❄️ आकाश❄️
💦 एक प्यारा सा सवेरा है
आकाश गगन में, मानो जैसे मेला है।
जहां तितलियां हैं ढेरों -२
वहां परिंदों का भी बसेरा है,
रंग बिरंगी पतंगों ने आकाश को यूं घेरा है,
चमचमाती बिजलियों ने फिर क्यूं आ आकाश समेटा है।
एक प्यारा सा सवेरा है...।
💦 यह आकाश वो केन्द्र हैं - २
जहां हर कोई पहुंचना चाहता है
क्योंकि उड़ना तो सबको आता है
पर ऊंचा उड़ाकर ले जाना कोई ही समझ पाता है ।
एक प्यारा सा सवेरा है ...।
💦 एक कशिश सी दिखती है आसमां में, -२
जिसने दुनिया के हर पंख को सींचा है
जहां पांच तत्व भी समाए हैं,
वहीं तो मेरा बसेरा है।
एक प्यारा सा सवेरा है
आकाश गगन में, मानो जैसे मेला है।..😊🌺💦
🙏🏻 धन्यवाद।
(बी.के) नविता