Hindi Quote in Poem by Dear Zindagi

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रात हुई फिर वो परिंदा जग गया,
चांदनी की छुपी नमी में दिल बहल गया।

ख़ुश्बू गुल सी रही हवाओ की लहर में,
तस्वीर पहरा लगाती रही इन ख़्वाबों के पैरहन में।

जागती रही इश्क़ का हाथ थाम कर,
साया इस दिल के दरवाजे के लम्हों में।

किस्से तो बने रिश्ते में इन कच्चे धागे की डोर से,
फिर क्यूँ सुनवाई करती रही चीख़ के भरी महेफिल में!

हर बार सोई हुई यादों को जगाने पर ये आवाज
गूंजती रही आशिक़ ए दीवानगी के हर लम्हे में।

इश्क़ को जुदा करने के बवाल में जुठी आश दी,
तब कोई ना आया यूँ सारे आम भरे दरबार में।

आशिक़ को पुकारते हुए बिखर गई टूट कर,
और वो रो रो कर थक गई जुदाई के हर लम्हें में।

एक एक लफ्ज़ ए अल्फ़ाज़ के किनारे पर,
उम्मीद बनी जिंदगी जीने के हर सफर में।

किताब के हर पन्ने को कलम से भर कर
इक तमन्ना चुभ सी रही उसको पाने की खुशी में।

DEAR ZINDAGI 💞

Hindi Poem by Dear Zindagi : 111619350
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