क्या यही तेरे प्यार की इंतिहा है
ये आँखें जागते हुए भी सोतीं है।
और इनमे बस तेरी तस्वीर होती है।
मचल जातीं हैं तुझे पाने के लिए
तेरे लिए ही हमेशा रोतीं हैं।।
जानतीं हैं कि तू नहीं आएगा
फिर भी एक नई उम्मीद संजोती हैं।
देखते देखते दरवाजे की चौखट पर
रोज रोज गमगीन होतीं हैं।।
तेरा नाम लेतीं है ख़ुदा की तरह
हर साँस के साथ तस्वीह की
माला में पिरोती हैं।।
स्वरचित
जमीला खातून