"जब तुममे कोई रस न बचे तुम मुझको पास बुला लेना सिकुड़ी चमड़ी जब तुम्हें चुभे भावों मे गले लगा लेना | नवनौवन की तृष्णा मे उठने वाला तब प्रेम , रहुँगा मैं , जब मरण समझ तुमको शैय्या पर अग्नी लगाई जायेगी, मै उस क्षणतक भी पास रहूँगा ,यह प्रीत निभाई जायेगी |"