खुश हूँ मगर जीवन की सच्चाई से हारी हुई हूँ
फुर्सत में नहीं फिर भी कहीं लम्हा खोयी हुई हूँ
ठहरी हूँ फिर क्यो मंज़िल की तलाश में चल पड़ी हूँ
बंन्धी हूँ तब भी आसमान में उड़ने की फिराक़ में हूँ
तमाशा नहीं हूँ फिर भी किरदार कई बया करती हूँ
नजर में हूँ इसलिए संभल संभल कर चलती हूँ
ख़ामोशीया समझती हूँ फिर भी हाल पूछ लेती हूँ
तंहाईयो केे कमरे में एक दीपक कही ढूंढ लेती हूँ
#yogitajain ✍🏻