प्रेम से बना हैं दुनिआ प्रेम ही इसका आधार हे।
रुक्मिणी की वलेही कान्हा हो लेकीन
नाम रौशन राधा, मीरा, और सुदामाका हे ।
सिस्य हैँ हम कान्हा के बाँटेंगे प्रेम की सुद्धा
इस संसारको याद दिलाएंगे कान्हा हे यहाँ सदा।
प्रेम सिमित नेहीं हे सिर्फ नारी ओर पुरुष मै।
कान्हा ने लेखा है इसको कहीं ग्रंन्थ इतिहास मे।
प्रेम सुधा चालों दोस्तों बाँटेंग इस संसारमे
इस जन्म को करेंगे सार्थक प्रेमपरिवासा मे।
जय जगन्नाथ
जय श्रीकृष्ण
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