इश्क़ तो बेपनाह है तुमसे
बिना तेरे एक पल हमसे जिया ना जाए
ये समाज दीवार बनकर खड़ा है
तुम्ही कहो कैसे तुमसे मिला जाए
चुरा कर ले जाएं तुम्हें
गर एक इशारा कर दो
तेरी रुसवाई का डर है और वक्त की नज़ाकत है
चलो इस राह से हम - तुम जुदा हो जाएं
-अनुभूति अनिता पाठक