जीने के अवसर पर मरने की दुआ क्यू मांगू?
गुट गुट कर जीने की तमन्ना ए दिल से क्यू करू?
रूह तड़प उठी आग से जल उठी ख्वाब ए ख़यालो में,
ख्वाहिश ए इश्क़ के मंजर में अब क़यामत क्या करू?
आँसू निकले और बुझा दिया हर जलती आग में,
जो आँखों में भड़क उठे नजरिये को राख होते उसे कौन बुजाए?
अकेले अकेले सागर की गहराई में छोड़ दिया साथ अब क्या करूँ?
जिसको दुनिया मानी उस दुनिया ने है दफना दिया अब भरोसा किस पर करूँ?
DEAR ZINDAGI 💞