"तुम मेरे लिए धड़कन जितनी ज़रूरी हो"
-तुमने कभी कहा था
मगर तुम अपने ही कहे अल्फ़ाज़
इतनी आसानी से भूल गए
हाँ ! मैं धड़कन हूँ..पर मुझे धड़कने के लिए
एक अदद दिल की तलाश है
मैं खामोश हूँ बरसों से, सच कहूँ तो..
"मुझे सिर्फ तुम्हारी तलाश है"
तुम खो गए हो वक़्त की धुंध में,
कि परछाईं नज़र से हटती नहीं
और. .चेहरा भी नज़र आता नहीं..
वक़्त की बेरहम खरोंचों से लहूलुहान हूँ मैं
मुझे क़ज़ा का नहीं ,ज़ख्म भरने का इन्तज़ार है..
मैं शमां हूँ अपने ही ज़हन की तारीकियों की,
पर मुझे रौशनी की तलाश है
"हाँ ! मुझे तुम्हारी तलाश है..।"
क़ज़ा-मौत
-मधुमयी