पूर्ण हुआ निवेदन मेरे अंतर्मन का
सहचर हुआ वो मेरा , जो था जनम - जनम का
अगणित दीप प्रज्जवलित , मेरे मन मंदिर में
मेरे प्रियतम आन मिले , जो बसते हिय में
संग ना छूटे कभी मेरा , मेरे प्रियतम से
हे चन्द्र दुहाई तेरी तुझको , तेरी किरण से
सदा चढ़ाऊं अर्घ्य तुम्हे , हर पूरनमासी
मेरा प्रिय हो साथ तो , हर दिन मथुरा काशी
प्रथम विदा लूं मैं , चरण रज लेकर उनकी
रहे ना कोई शेष , सद इच्छा मेरे मनकी
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