*ज्यादा हंसने और बोलने वाला व्यक्ति*
*अगर चुप हो जाए*
*तो मान लेना वह भीतरसे टूट चुका है। ।*
*जो व्यक्ति सदैव* *हंसता-खेलता , मुस्कुराता रहता हो।* *अगर वह अपने स्वभाव से भिन्न हो जाए अर्थात चुप गुमसुम उदास रहने लगे।* *तो समझना उसके हृदय में एक पीड़ा है ,* *उस पीड़ा ने उसे कमजोर बना दिया है।*
*जिस व्यक्ति के पास संतुष्टि नहीं है*
*उसे कितना भी मिल जाए वह असंतुष्ट ही रहेगा। ।*
*जिस व्यक्ति के पास संपूर्ण धन-दौलत , ऐश्वर्य , वैभव सब है , मगर संतुष्टि नहीं है।* *उस धन दौलत का कोई अर्थ नहीं।* *वह सदैव असंतुष्ट की स्थिति में ही रहता है।* *जिसके पास संतुष्टि है वह थोड़े में भी संतुष्ट रहता है।।*
*शुभ रात्रि*