तनहाँ तनहाँ , क़तरा क़तरा,
जी रहाँ हूँ मे,
इस भरी दुनियामें कहाँ ढूँढूँ
मेरे दिल के सुकून को,
हे अगर कहीं भी तूँ,
आके मिल जा एकबार,
तेरे आने से सायद थोड़ा सुकून तो मिले
मेरे सुने दिल को,
वरना ज़िंदगी तो यूँही निकल जायेंगी
तेरे इंतज़ार में, कहीं देर न हो जाए
देर से आये भी तो
कहीं मे ना मिल पाँवू।