# कविता ***
# शरदपूर्णिमा *
शरद पूर्णिमा की रमणीय ,रात आई ।
पूर्णिमारास की अनमोल ,धड़ी आई ।।
चाँद और चाँदनी के मिलन ,की रात आई ।
राधा के संग कृष्ण ,के खैलने की रात आई ।।
प्रेमियो के प्रियतम से ,मिलन की रात आई ।
गोपीयों के संग कान्हां ,के खैलने की रजनी आई ।।
दिल से दिल को मिलाने ,की रात आई ।
अंखियो से अंखियाँ मिलाने ,की रात आई ।।
वादे कसमें निभाने की ,सुहानी रात आई ।
आत्मा और परमात्मा ,के मिलन की रात आई ।।
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