त्रेता युग की एक कहानी
सुंदर और पावन है त्योहार
कहते हैं राम ने मारा रावण को
मुक्ति मिली संसार को
रावण के घोर अत्यचार से
क्या हुआ सच में ऐसा
होता अगर ऐसा
फिर क्यों जलता हर साल रावण
वो तो था केवल एक प्रतिबिंब
कलयुग के अनेकों रावण का
जो कर रहे हैं अधर्म।
त्रेता युग में था एक रावण
आज हैं अनेकों रावण
तक हुआ एक स्त्री का अपमान तो हुआ युद्ध
अब होते अनेकों के
क्यों है सारे चुप
अब ना कोई राम
है माना हमने
लेकिन इंसान तो हो
रखो थोड़ी इंसानियत
हर साल भस्म होता रावण
ना होता भस्म रावण अंतरात्मा का
फिर क्यों फूंकते रावण को।
( ज्योति कुमारी )