नहीं बनना मुझे देवी , न पूजो मुझको तुम अब तो
मेरी पहचान रहने दो , मेरा अस्तित्व रहने दो
नौ दिन पूजकर मुझको , ढोंग करते हो भक्ति का
जीने दो खुले नभ में मुझे , नदी की तरह बहने दो
पूजते मुझे तुम हो और , मेरा हक़ छीनते हो तुम
मैं भी एक इंसान हूं , मुझको बस इंसान रहने दो
कहते हो तुम मुझे देवी , और जीने भी नहीं देते
मुझे भी हक है जीने का , मुझे मेरी बात कहने दो
मैं धरती हूं , मैं सृष्टि हूं , शक्ति का पुंज भी मैं हूं
मैं जननी हूं , नहीं हूं बोझ , मुझे हर कष्ट सहने दो
क्यों इतना खौफ़ है मुझसे , मारते जन्म से पहले
नष्ट हो जाएगी यह सृष्टि , इसका अस्तित्व रहने दो
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