सुदंर रचना ....
धन धर खरीदने को जुटा लाऊँ किस तरह ।
मंहगाई मे बचत मै बढा पाऊं किस तरह भर के किराया पैसा मेरा जाया हो रहा
पाई पाई मै जोड के दिख पाऊं किस तरह ।
लाखो का धर वेतन से कठीन है खरीदना ।
बीबी मांगती हर दिन नयी नयी फरमाईशे ।
कम वेतन मे उसकि मांगे पुरी करूं तो किस तरह ।
डिग्रियां बहुत ले ली पर नौकरी नही मिली ।
मिली तो केवल दस हजार की ,उसमे धर चलाऊं किस तरह ।
नंबे परसेट वाला बाहर धुमता ,छतीस परसेट वाला साहाब बना ।
ये भेदभाव कब तक मै इस जहां मे सह पाऊं किस तरह ।
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