जय हो गणेशजी की..
सुदंर कविता जो मुझे अच्छी लगी आप पढे...
ये दौलत मेरी तुम उडा तो ना दोगे ।
बुढापे मे मुझको रुला तो ना दोगे ।
गंवाई है नीदें ,बहाया पसीना ।
यूं पानी की तरह तुम सब बहा तो ना दोगे ।
लिया था वो कर्जा ,मकान बना है ।
चुकाई जो किश्ते ,बना फिर आशियाना
किसी की बातो मे आकर उसे मिटा तो ना दोगे ।
नशा था मुझे बैक मे धन जमा कराने का ।
कही आवारा दोस्तो की संगति से इसे लुटा तो ना दोगे ।
पढा लिखा कर बनाया लायक तुम्हे ।
किसी की बातो मे आकर इसे मिटा तो ना दोगे ।
पढी लिखी बहु से शादी करवाई मैने ,कही उसकी बातो मे आकर हमे वृद्वाश्रम मे रख आओगे तो नही ।
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