मेरी कलम से पढे ...
इंसान कितना भी करे कर्म मगर ।
भाग्य के आगे झुक जाना पडता है ।
धर की बुनियादे मजबुत करने के लिए धर का बोझ अपने हाथो उठाना पडता है ।
लोगो की प्यास बुझाने के लिए ,सागर को बादल बन बरसना पडता है ।
जिनके पास ना हो आबरु की चादर ।
उनको जीते जी मर जाना पडता है ।
दुनिया के द्वार यूं ही नही खुलते सभी के लिए ।
दीवारो से सर टकराना पडता है ।
नदी चाहे कितना भी लड ले पत्थरो से ,
मिट्टी बन उसको बह जाना पडता है ।
जुनुन का पेड सीचने से पहले ,कुछ हसीन ख्वाबो का खून बहाना ही पडता है ।
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