शानदार .कविता ..
# विषय .दिल तो परिन्दा है "
दिल तो मेरा ,एक परिन्दा ठहरा ।
कोरोना के भय से ,पिजंरे में बंद हुआ ।।
कही आ जा नही सकता ,मन से व्याकुल हुआ ।
अब तो पिजंरा तोड ,कर स्वच्छ नभ में उडना चाहता ।।
मित्रों के संग अब गपशप ,लगाना दिल से चाहता ।
अनेक तरह के व्यंजन ,खाना खिलाना चाहता ।।
बेचारा अकेला अकेला ,धर में आंसू बहाता ।
प्रकृति की रमणीय गोदी ,में खैलना चाहता ।।
कोरोना जैसी बिमारी ने ,सभी रोजगार छिन लिए ।
लाचार सा पाई पाई ,के लिए तरसता रहता ।।
मंदिरों में जाकर ,दर्शन करना भी चाहता ।
अपने सभी अरमानो ,को फिर सजाना चाहता ।।
क्या करे दिल तो ,एक परिन्दा ही ठहरा ।
पिजंरा तोड अब ,उड जाना ही चाहता ।।
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