अक्सर ये सफर मे अकेले खुश हुवा,
खूश्बू ओ से महकी सांसो मे फसा हुवा,
किनारे पर बैठें गहराई मे डरा सा हुवा,
जरुरत मे हर बार जान लुटा ता हुवा,
जख्म हुवे दिल को अंधेरो मे सहता हुवा,
आहट मे उसके लफ्ज को मन से लगता हुवा,
लिफाफे हर इश्क़ के दुनिया से छुपाते हुवा,
मे जी कर भी तडप रहा खमोस बना हुवा,
मेरि गलती को खोज रहा सिने मे जुजता हुवा,
वो हसिन को गाव कोनसे मिले खुद को कोसते हुवा।
❣ इश्क़ के अनकहे लिफाफे ❣