#नवरात्रि
बना कर मूरत माटी की , खूब किया सिंगार l
हाथ जोड माथा टिका , मांगे है ढेरों बरदान ll
चंदन तिलक माथे लगा, कर दिया पूजन वंदन l
हार पुष्प इत्र चढ़ा , कितने खुश होते जग नंदन ll
भजन आरती, जयकारों से गूंज गये घर आंगन l
सजे भवनों की चकाचौंध मे खो गये मन चंचल ll
जोत जगी दिन रात , खूब बाटे मेवा मिस्ठान l
नो दिन सेवा मूरत की कर, सिरा दिये भगवान ll
- RJ krish