.
ज़मीन और आसमान हैं, जिसकी हद है
फ़क़त इक इंतज़ार ही है, जो कि बेहद है
हद से बे-ख़बर चश्म-ए-तर है इंतज़ार में
शुक्र है कि अश्कों को आहों की मदद है
--------------------
-सन्तोष दौनेरिया
(फ़क़त - only, चश्म-ए-तर - wet eyes, आहों - sighs, मदद - help)
.