हास्य कविता ...
# विषय .जोरु का गुलाम ....
शादी के पहले ,शहनशाह बना फिरता ।
शादी के बाद ,जोरु का गुलाम बना ।।
सीधा साधा आदमी ,माँ बाप को ताने देता ।
जिसने उसे जन्म दिया ,वो आज पराया हुआ ।।
पत्नि खासमखास हुई ,जोरु का गुलाम बना ।
जो एक इशारे पर ,माँ बाप का कहना मानता था ।।
आज पत्नि के इशारे पर ,पराया सा बना ।
अब झाडे पौछा ,दिन भर करता फिरता ।।
जोरु के सामने ,भीगी बिल्ली पल में बना ।
मालिक के वफादार ,कुत्ते की तरह वह तो ।।
जोरु के इशारे पर , दुम हिलाने लग गया ।
जोरु का गुलाम ,बना ना करें यारो ।।
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