गुलाब कुछ कहता ..
# छंदमुक्त कविता .....
लोग मुझें सुदंरता ,का खजाना कहते ।
मेरी खुशबु पर ,दिल को महकाते ।।
मुझे देख कर ,अपना दिल बाग बाग करते ।
मुझें तोड़ कर ,अपने आराध्य देव पर चढाते ।।
पर वो सदा मुझे ,कांटो में खिलता देखते ।
मैं वहाँ रह कर ,रात दिन कष्टो को सहता ।।
मेरी कोमल काया ,में ये सदा चूभते ।
तब जाकर में ,सब को खुशबु देता ।।
जब तक जीवन में ,दुःख ना सहोगे ।
तो मेरे समान ,तुम कैसे खिलोगे ।।
वो ही निखर कर ,गुलाब सा बनता ।
इसलिए मैं खुशबु का ,राजा कहलाता ।।
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