मलाल ए इश्क़ में आज किताबी पन्नों में कलम से स्याही ख़त्म हो रही है,
चलो रहने दो मेहबूब बनने का ये सिलसिला इश्क़ म् भरपूर नही है।
तराजू से नापा जाए वो दिल मे राज़ रूह के सँभल गए है,
अच्छा आवारगी के लम्हों में आप के हौसलें क्या कमजोर हो गए है..?
अल्फ़ाज ना मिले जो दिन ब दिन के जलवे में टूटते अहसासों के,
समझ जाओ आप कि प्यार के काबिल अभी तक बने ही नहीं है।
DEAR ZINDAGI 🙃🙏