में घर के कोने में बैठ खिड़की से देख रहा हूँ,
वो चल रही है कदम भी बढ़ाते जा रही है।
जमीन हिल रही भूकंप आ रहा है जरा सा,
उसके पाँव तले से जमीन हटती जा रही है।
रवैया जो भी था ए दिल ये इश्क़ का जान को जान हानि पहुंचा ना,
रुक्षद हो रही है फिर भी एक जो उसे अन्दर खामोशी खा रही है।
दिलबर है कि उससे खुदा की नियति एक सच्ची लिखावट से मुस्कुराता था,
वो रहे ना रहे दुल्हन जैसी जिंदगी बन हर वक़्त उसका साथ निभाएगा।
DEAR ZINDAGI 💞