शानदार कविता ...
# विषय .नारी का सम्मान ..
बरसो से नर नारी ,को पैरो की जूती समझता आया ।
बरसों से नर नारी ,पर अत्याचार करता आया ।।
बरसों से नारी को ,अपवित्र करता ही आया ।
यह समझ नही पाया ,कि नारी बिना वह अधूरा ।।
उसके साथ बिना वह ,निर्थक जीवन जीयेगा ।
एक बार तू नारी का ,सम्मान करके तो देख ।।
तू जग में बेहतरीन ,स्नेह से नहा जायेगा ।
तेरा जीवन मधुमास की ,तरह सुगंधीत होगा ।।
पर नारी के महत्व को ,आज तक नही समझा ।
हर पल नारी को ,चौधार आंसू रुलाता आया ।।
बलशाली रावण भी ,सीता के आंसू से नष्ट हुआ ।
दुयोर्धन भी द्रौपदी के ,आंसू से फना हुआ ।।
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