आकांक्षा / महत्वाकांक्षा
तुम आकांक्षा करना, महत्वाकांक्षा नहीं
हर ख्वाहिश पूरी होगी, हर मुकदर तेरा होगा
बस शर्त इतनी सी है
तुम संयमी बनना लालची नहीं।।
तुम आकांक्षा करना, महत्वाकांक्षा नहीं ।।
मिट्टी की कभी महत्वाकांक्षा नहीं रही कि,
उसे मूर्ति में ढाला जाए या घड़े में
बस आकांक्षा इतनी सी रही कि,
हमें शीतलता प्रदान कर सके
फिर चाहे वह मन की हो या कंठ की।।
तुम आकांक्षा करना, महत्वाकांक्षा नहीं ।।
तुम्हें तो बस पुरुषार्थ करना है
फिर जो मिले, जितना मिले,
उससे ही अपनी आकांक्षा को सँवारना है।
फिर तो बात इतनी सी है
एक दिन मुकदर भी तेरा होगा और राह भी।।
बस
तुम आकांक्षा करना, महत्वाकांक्षा नहीं ।।
-क्षमा