अब भी मुझको प्यार है
कह दूँ तो श्मशान है,
मन ही मन में रख दूँ तो
बहुत बड़ा आराम है।
जग भी ऐसे हँस देता है
जैसे वही सच्ची आवाज हो,
शुभ समय कहाँ निकलेगा
इसका नहीं अनुमान है।
राह जहाँ छूट गयी है
उससे आगे खोज है,
मन से मन जब मिल गया
वहीं स्नेह का तीर्थ है।
** महेश रौतेला