Jai shree krishna
तुझे सर्वत्र देखना चाहूँ मैं,
अपने मन से मैं निकालना चाहूँ ' मैं ',
जब तक निकलेगा नही ' मैं ',
तुम्हे सर्वत्र देख ना पाऊंगा मैं,
तुम्हारे बिना नही है मेर कोई अस्तित्व,
हर जगह बस तू है,
व्यर्थ है यह प्रशन की तू ऐसा क्यूं है,
वास्तविक तो बस तू है,
फिर यह प्रशन क्यूं है,
तुझे सर्वत्र देखना चाहूँ मैं,
तुझ्मे समर्पित है,
मैं और मेर ' मैं ' ।।