करुणा...
टीवी सीरियल में माता पिता के रोने पर आंसू बहाते हो मगर घर में अकेले माता पिता के हाल पूछने को वक़्त नहीं।
स्वार्थ के कारण दुनिया के हर कायदे कानून एवं नियम बदल देते हो पर जरूरत मंद को मदद करने में कई अनकहे नियमों में बांध ने का ढोंग रचते हो।
इंटरनेट पर अंजान लोगों के आकर्षण में पूरा दिन व्यर्थ करते हो लेकिन अपनों के लिए सोचने तक का समय भी नहीं निकालते।
घर में पालतू जानवरों को खुद के बिस्तर पर सुलाते हो पर अगर रास्ते पर चलते बीच में आने वाले किसी सड़क के जानवर को हटाने के लिए जोर से लात मार देते हो।
गाय माता का दूध रोज पीना है पर उसी गाय को घर आने पर भगा देते हो।
किसी के बर्ताव पर आंकलन करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हो लेकिन खुद की अभद्र भाषा पर आंकलन कभी नहीं किया।
एक जानवर भी अपनी माता, बच्चों और अपनों से बिछड़ने पर विलाप करते है तो मनुष्य में तो भावनाओं का समन्दर बहता है फिर करुणा कहा गायब हो गई?!
अगर ये सच नहीं तो क्यों रोज बलात्कार, खून, लूट जैसे कई अमानवीयता कांड होते आ रहे है!?
#करुणा