दिया करता है हर मौसम संभलने का वास्ता,
दे दिया जाए महबूब को इश्क़ का वास्ता।
गहराई में डूबे मोती सागर में छुपी धूप,
खयाल में भी हकीकत जैसी पनाह के लम्हों को।
हर जज्बात में बसे है दिमागी दिक्कत का वास्ता।
जिस्म को रूह से जुड़ने के लिए हमदर्दी का वास्ता।
DEAR ZINDAGI ❣️