जब पूछा किसी ने क्या आता है तुम्हें
कुछ देर शांत रहकर आत्मविश्वास से कहा।
मुझे शब्दों को सजाना आता है।
मुझे किसी दृश्य को, किसी के जज्बात को, किसी की मोहब्बत को, अपनी कविता में संजोना आता है।
मुझे किसी के भावनाओं को और जज्बातों को सुनकर और लिख कर उनका हमदर्द बनना आता है।
मुझे कुदरत के बारे में लिखकर भगवान से हौसला मांगना आता है।
मुझे अपनी कहानी लिखनी आती है और दूसरों की महसूस करनी आती है।
मुझे खुद को लिखना आता है और किसी इंसान को को पढ़ना आता है।
किससे को कहानी में और कहानी को कविता में बदलना मुझे आता है।
मुझे शब्दों में उलझे रहना आता है, बस मुझे शब्दों को सजाना आता है ।