सुदंर हास्य कविता मेरी कलम से ..
चुनाव ..
आया चुनाव का मौसम मेढक टर् टराने लगे अति भारी ।
कोई जमीन फोड कर निकला ,कोई नाला कुद कर आया ।।
कोई आरक्षण के लिए टर् टर् करता ।
कोई बेरोजगारी के राग अलापता ।।
कोई रंग बिरंगी बाते करता ,कोई लोगो को देख अपना रंग बदलता ।
सभी एक राग मे सप्त रंगी राग अलापते ,चाहे कोई सुने ना सुने ।।
कोई आसमान धरती पर लाने का आश्वासन देता ।
कोई चांद तारे तोड लाने की बातें करता ।।
कोई दिन में तारे दिखलाने का लालच देता ।
कोई भीड देख कर आंसु बहाता ,हमदर्दी जताता ।।
ये मौसमी रंग बदलने मे माहिर सारे ।
मौसम बितते ही छूं मंतर हो जायेगे ।।
पांच साल बाद फिर मिलने आयेगे ।
कोई इनकी बातो मे ना आना ,ये धडीयाली आंसू बहाने में माहिर ।।
आपका सब कुछ खा कर डकारने वाले ।
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