हमारा जबलपुर
हमारा प्यारा जबलपुर, हमको प्राणों से प्यारा है| जन्मभूमि है यह हमारी, हमको सबसे न्यारा है||
जाबालि ऋषि थे यहां पर, जिस कारण ये जबलपुर कहलाता है|
भारत की संस्कार दानी यह, संस्कारों का इससे नाता है||
मदन महल किला यहां पर, हमको स्वाभिमान दिलाता है|भेड़ाघाट क संगमरमर,जबलपुर की सुंदरता बतलाता है||
भंवर ताल गार्डन यहां का, हरियाली दर्शाता है|
नेक भावना,इमानदारी रखना, जबलपुर ही तो सीखलाता है||
बड़ा फुहारा बाजार यहां है,जहां सब कुछ मिल जाता है, इसी कारण जबलपुर हमारा, स्मार्ट सिटी कहलाता है||
नर्मदा माता के जल से,शोभित यहां की जनता है|
यहां के भजिए,पकोड़े हो या जलेबी, खाते ही बनता है||
चलो इस कविता को, अब हम समाप्त करते हैं|
जबलपुर के गुणगान गाते हुए, अब हम यहां से चलते हैं||
Aadiyan Dubey
Poet & Writer