कोई तस्वीर ना सजोई बस लम्हे पास है,
जब भी देखो बस याद ही याद है।
छुपा है चांद अधा बदलो में,
कुछ टूटा हुआ है या नाराज़ है।
ये अलग बात दूर से देखने पर नजर आता है पुरा,
उस चांद से पूछो आज कल किसके साथ है।
बड़ा सुहाना मौसम है आज कल,
अवध की शाम में ठंड की शुरुवात हैं।