हास्य कविता ..
विषय .जमाईराजा ..
पहलीबार जमाईराजा ,ससुराल पहुँचे रे ।
सुदंर वेशभूषा को ,टनाटन पहन कर रे ।।
पांव में बहुमूल्य ,जुतें चकाचक पहने रे ।
सुहावना मनमोहित ,इत्र छांटा महका रे ।।
धर के दरवाजे पहुँच ,आवाज लगाई रे ।
धर से नौ नौ सालीयाँ ,स्वागत को आई रे ।।
चमाचम कुर्सी को ,सजाधजा के बिछाई रे ।
जैसे जमाईराजा बैठे ,धड़ाम से गिरे रे ।।
नानी पल में याद ,आ गयी उनको रे ।
शरीर का कचुम्बर निकला ,हेकडी सब भागी रे ।।
फिर पकवान खाने को ,पाट पर बिठाया रे ।
पकवान देख कर ,मन बहुत ललचाया रे ।।
पहले दाल चावल का ,कौर मुँह में रखा रे ।
आँखों में पानी आया ,मुँह फटा का फटा रहा रे ।।
सोने के लिए ,सुदंर खटियाँ बिछाई रे ।
सोने गये तो ,पुरानी खाँट टूट गयी रे ।।
उठकर जमाईराजा ,धर की तरफ भागे रे ।
फिर कभी लौट कर ,ससुराल नही आये रे ।।
दुल्हन का मुख भी ,बेचारे नही देख पाये रे ।
सालीयों का मजाक ,बहुत भारी पड़ा रे ।।
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