तुम रुखसत हुई इससे मै इत्तेफाक़ नहीं रखता,
मै अब,
तुम्हारी याद में लिखूंगा आयातें,
जो भरी होंगी हम दोनों के रूहानी इश्क़ से,
मै नहीं करूंगा इंतजार,मै लिखूंगा,और लिखूंगा,
और फिर,
एक ना एक दिन मेरे लिखे वे आयात
पहुंचेंगे तुम्हारे दिल के नज़दीक,बहुत नज़दीक,
और फिर,
तुम नही रोक पाओगी खुद को मेरे पास आने से,
क्यूकि तुम्हारे पास नहीं होगी और कोई राह,
नहीं होंगे सिकवे - गिले,ना ही कोई नया फरेब,
और तब तक,
हो चुकी होगी शायद बहुत देर,मै तो नहीं रहूंगा जिंदा,
रहेंगी बस मेरी लिखी आयात में खींची आख़िरी लकीरें,
और वो
काफी होंगी,देने को मेरी वफादारी की सबूत।
मैंने वहां लिख रखा है,गुज़रे लम्हों की दर्द भरी दास्तां
जिसका चस्मदीद मै खुद था,अकेले तुमसे बहुत दूर,
और तुमने
साफ इंकार कर दिया था,मेरी दलीलें सुनने से,
और कर गई थी रवानगी मेरी तंग जिंदगी से,
जब मुझे थी ज़रूरत सिर्फ तुम्हारी और तुम्हारी
और हां..
चढ़ा देना वही गुलाबी फूल मेरी कब्र पर
जो मेरा पसंदीदा हुआ करता था हमेशा से
हां.. वही गुलाबी होठों का सर्द इजहार।
और तब
मेरी रूह हो जाएगी आजाद लिखने को,
और नए आयात अगली मुलाकात के इंतज़ार तक।
अलविदा..!
..रॉयल..