रिश्ता दोस्ती का ईमानदारी से निभाना है,
तुम याद रखना हमे दूर नहीं जाना है।
तुम्हे याद होगा जब हम साथ खेले थे,
जब भी मिलते दुनिया से अलबेले थे।
उस अलबेला पन को साथ लेकर चलना है
तुम याद रखना हमे दूर नहीं जाना है।
फिर मिट्टी का घर बनाकर नदी किनारे चलना है,
तुम गुड़िया लाओ उसको आज सजाना है।
वो चूरन की पुड़िया हम फिर बाट लेंगे,
आधी तुम रख लेना आधी साथ खा लेना है।
कितना मुश्किल हुई है ना अब जिंदगी अब,
उदास नहीं होना हर वक्त मस्कराना है।