माना नींद नही किस्मत में मेरी
फिर क्यूँ ख्वाब दिखाते हो तुम
माना साथ नही #तुम्हारा किस्मत में मेरी
फिर क्यों दिल को बेकररार करते हो तुम
माना बारिश नही किस्मत में मेरी
फिर क्यों हमे बारिश की बूंदों में दिखते हो तुम
माना उजाला नही किस्मत में मेरी
फिर क्यों अंधेरे में छुप जाते हो तुम
माना वफ़ा नही किस्मत में मेरी
फिर क्यों इस बेवफाई से हमे देखते हो तुम
माना तू चकोर है मेरी
फिर क्यों हमें चाँद बनने के लिए मजबूर करते हो तुम