(((यूँ इश्क़ के समुंदर में,
एक दिन खो जाना है )))
शोर- ए- दरिया को...!
यूँ लफ़्ज़ों में सुनाना है....!!
तसव्वुर में यार रख...!
बस लिखते जाना है....!!
यूँ इश्क़ के समुंदर में.........!!!
एक दिन खो जाना है.......!!!!
बहते हुए पानी सा...!
इश्क़ फ़रमाना है....!!
बागी हुई लहरों को...!
किनारे पार लगाना है....!!
यूँ इश्क़ के समुंदर में........!!!
एक दिन खो जाना है......!!!!
इश्क़ की गहराई को...!
जज़्बातों में नापना है....!!
कश्ती बना एहसासों की...!
पतवार बन जाना है....!!
यूँ इश्क़ के समुंदर में........!!!
एक दिन खो जाना है......!!!!
तिश्नगी की हर हद को...!
पार कर जाना है....!!
तुम कश्ती के मांझी...!
मुझे तलबगार बन जाना है....!!
यूँ इश्क़ के समुंदर में.........!!!
एक दिन खो जाना है.......!!!!
ग़र मिले सोहबत यार की...!
फ़ना हमें हो जाना है....!!
दास्ताँ- ए- इश्क़ को...!
सरेआम सुनाना है....!!
यूँ इश्क़ के समुंदर में.........!!!
एक दिन खो जाना है.......!!!!
सागर किनारे रेत पर...!
नाम अपना लिख जाना है....!!
ख़ुदा बना यार को...!
सजदे में सर झुकाना है....!!
यूँ इश्क़ के समुंदर में.........!!!
एक दिन खो जाना है.......!!!!
~माहिरा चौधरी ✍️