उसकी याद में खोया - खोया सपनों के जाल बुन रहा था
सूना अम्बर ज्यों चुपके से , क्षितिज से कुछ कह रहा था
शीतल पवन की सरसराहट , मुझसे कुछ
बयां कर रही थी
पीली सरसों बलखाती सी , मदमस्त गीत गा रही थी
गेहूं की बालियां निखर - निखर , अपना यौवन दिखलाती थीं
रंग - बिरंगे फूलों की टोलियां , गीत प्रणय के गाती थीं
पीताम्बर पहनें भंवरों को , फूलों का यौवन ललचाता था
हरियाली आंचल धरती का , दूर तलक लहराता था
भरपूर प्रकृति का यह यौवन , झंकृत करता मन के तारों को
पुलकित हर जीव प्रेमरस में , हर्षाया देख बहारों को
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#पीला