वो नशे में धुत होकर रोज़ चिल्लाता रहा
पढा लिखा इंसान उससे खुद को बचाता रहा
कौन मुंह लगे ऐसे लोगों के ये सोच
हर इज़्ज़तदार नज़रे चुराता रहा
हिम्मत उसकी दिनो दिन बढ़ती गई
और नज़रों में हैवानियत चढ़ती गई
फिर एक रोज़ दे दिया अंजाम उसने
कुछ ऐसी शर्मनाक घटनाओं को
शीश झुक गए मानवता के
सबक दे दिया उसने कई पिताओं को
यदि वक़्त रहते कोई उठाता कदम
झूमता था जब सिर्फ वो गलियों में
ख़ौफ़ दिल मे उसके उसी वक़्त बिठा दिया होता माँ कसम
तो आज ये दिन नही देखना पड़ता
एक बेटी के बाप को तिल तिल कर ना मरना पड़ता
मानसिकता कुछ इस कदर बन गई है
हम तो पढ़े लिखे हैं हमारी तो बन गई है
जरूरी नही गिरहबान पकड़ के ही हिम्मत दिखाओ
रास्ते और भी हैं सोचो और उन्हें भी आज़माओ
नज़रे चुराने से तू खुद भी चोर बनेगा
ऐ के हंगल बन कर चारों तरफ सन्नाटा ही पसरेगा
अमिताभ नही बन सकता तो कोई बात नही
पर भीड़ में खडे होने वाले चेहरों में तू शामिल नही
कायरता की कहानियां सुनाए होती ऐसी कोई दादी नानी नही
आखिर तेरी रगों में लहू बहता है कोई पानी नही
तमाशबीन बनकर तू खुद का ही तमाशा करेगा
आज ये हंसता है तेरे पर कल को वो भी हंसेगा...👍
Atul Kumar Sharma ' Kumar '