#शिकार
शिकार- शिकारी का खेल केवल नियति ही जानती है सही समय पर सूत समेत करनी की भरनी करती है
सौं झूठों के नीचे दबा वों सच शिकारी बनकर आयेगा तुम्हारें बनाये मायाजाल में शिकार तुम्हें बनायेगा
इस नियति के खेल से कहाँ कौन बच पाया है
इस झूठ फरेब के बीच इसका ही तो बोलबाला है।