शिकायतों का ढेर है,
कोई उम्मीद नसीब नहीं,
मायूसी का महोताज है,
मुलाकाते फ़िज़ूल है,
रिश्ते कई है निभानेके,
पर दिलसे नाता नहीं है,
जालिम है महफ़िल यहाँ,
मासूमियत मरी हुई है,
दुनियाके दस्तूर हजारो है,
कामियाब बदमाश यहाँ है,
मोके नहीं उगारनेके ,
डूबने के गड्ढे कई है,
जिंदगी अकेली हो गई हे,
साथ निभाते निभाते खो गई है,
उज्जड हो गए है मक़ाम सारे,
बेमतलब दुनिया खड़ी है!
-setu