है तुं....।
तमन्ना की राहों मे खडी
मिशाल है तुं।
हर सवालों का आखरी
जवाब है तुं।
सजा किसी ज्ञानी पे वो
खिताब है तुं।
मझधारे मे रहे अडिग वो
नाँव है तुं ।
काँटो मे खिल मुसकाया
कोई गुलाब है तुं।
लाखो रिश्तों से भी न झुक पाये..
ऐसी दोस्ती का इमान है तुं...।
डॉ. सरिता (मानस)