की, कितनी महफूज रख उसे सजाया,,,!
हर एक जगह मान सम्मान दिलवाया,,,!
चाहत के हर एक रंग से खुशनुमा बनाया,,,!
निगाहों में काजल भर हर एक की नजर से बचाया,,,!
घटाओ जैसी ज़ुल्फों को हवाओं में लहराया,,,!
सफ़र में चुभते कांटो को फूलो का लम्हा बनाया,,,!
क्या क्या कहूं इश्क़ का ताल्लुक रूह से समझाया,,,,!
फिर पत्थर की कली को दिल का वजूद दिलाया,,,!
ढूंढ़ते ढूंढ़ते आए कई आशिक़बाज और हमारी नजर के समाने उनका बनाया।
और क्या टूटे दिल के लफ़्ज़ों को शायराना अंदाज हमने दिलाया।
DEAR ZINDAGI 🤗