हिंदी दिवस पर एक विचार
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मित्रों !हिंदी-दिवस की हम सभी को अशेष शुभकामनाएँ जिनके लिए प्रतिदिन 'हिंदी-दिवस'है | लगभग तीस वर्ष पूर्व एक प्रश्न मन में उगा था जो शब्दों में कुछ इस प्रकार चित्रित हुआ था | आप सब मित्रों से साँझा कर रही हूँ ----
मेरी -तेरी ,सबकी भाषा तुतलाने की एक है ,
ये माटी है माँ हम सबकी ,रक्त हमारा एक है |
-पाँचों तत्व वही हम सबमें ,प्राणों में 'वो' एक रमा ,
कैसे-कैसे करूँ बड़ी हम सबका 'वो' एक सगा !
मेरी तेरी सबकी भाषा मुस्काने की एक है ,
मुस्का के तो देख ज़रा बंदे सारे ही नेक हैं !!
मेरी,तेरी ,सबकी भाषा -------
-साँस -साँस पर पहरे बैठाए कुछ पहरेदारों ने ,
नेक-नेक को रस्ते ग़लत दिखाए ग़म के मारों ने |
मेरी-तेरी , सबकी भाषा ,समझाने की एक है ,
आँख खोल तू सपने से जग ,लक्ष्य हमारा एक है --!!-
मेरी -तेरी ,सबकी भाषा तुतलाने की एक है ,
ये माटी है माँ हम सबकी ,रक्त हमारा एक है ||
सभी स्नेही मित्रो को शुभकामनाएँ
डॉ. प्रणव भारती