पुरूष नौकरी कर कमाता है तो सोचता है की मैं अपनीं स्त्री बच्चें और परिवार का पालन पोषण कर अच्छे से जीवनयापन करूँगा...और वहीं स्त्री अगर नौकरी कर कमानें लगती है तो सोचती है की मुझें जीवनयापन के लिये अब किसी पुरूष की आवश्यकता नहीं...ये कड़वा तो है मगर सत्य भी है...