आँख से दूर ना हो दिल से उतर जायेगा .
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा.
इतना मानूस न हो ख़िल्वत-ए-ग़म से अपनी ...
तू कभी खुद को भी देखेगा तो डर जायेगा .
तुम सर-ए-राह-ए-वफ़ा देखते रह जाओगे ..
और वो बाम-ए-रफ़ाक़त से उतर जायेगा .
ज़िन्दगी तेरी अता है तो ये जानेवाला...
तेरी बख़्शीश तेरी दहलीज़ पे धर जायेगा.